एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में हालिया वृद्धि ने आम भारतीय परिवारों के रसोई बजट को प्रभावित किया है। मार्च 30, 2026 से लागू हुए इन नए दरों ने मध्यम वर्गीय परिवारों के मासिक खर्चों में उछाल ला दिया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा घोषित इस वृद्धि का सीधा असर देश के हर घर पर देखा जा सकता है।
प्रमुख शहरों में नई दरें
मार्च 30, 2026 से लागू हुई नई दरों के मुताबिक दिल्ली में अब एक 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹913 हो गई है, जो पहले ₹853 थी। मुंबई में यह नई कीमत ₹912.50 हो गई है। कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में भी इस बदलाव का असर देखा गया है जहां यह दर क्रमशः ₹939 और ₹928.50 तक पहुंच गई है। वहीं बेंगलुरु में यह ₹915.50 और हैदराबाद में ₹965 तक पहुंच चुकी है। देश के कुछ अन्य शहर जैसे लखनऊ और पटना में भी एलपीजी सिलेंडर की कीमतें बढ़कर क्रमशः ₹950.50 और ₹1,002.50 हो गई हैं, जो सबसे अधिक हैं। इन दरों में भिन्नता स्थानीय करों, परिवहन लागत और राज्य सरकार के वैट की वजह से होती है।
अंतरराष्ट्रीय कारण और प्रभाव
एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों के पीछे दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। सबसे पहले, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव ने पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति पर दबाव डाला है। इसके अलावा, सऊदी अरब द्वारा निर्धारित “Saudi Contract Price” में वृद्धि ने भारतीय बाजार पर अतिरिक्त बोझ डाला है। भारत अपनी अधिकांश एलपीजी आवश्यकताओं को आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की हलचल यहां सीधे महसूस होती है।
घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर का अंतर
घरेलू एलपीजी सिलेंडर का वजन 14.2 किलोग्राम होता है और इसे रोजमर्रा के खाना पकाने के लिए उपयोग किया जाता है। इस पर सरकार सब्सिडी देती है जिससे यह आम जनता को कम कीमत पर मिलता है। दूसरी ओर, कमर्शियल सिलेंडर का वजन 19 किलोग्राम होता है जिसका उपयोग होटल्स और रेस्तराँओं में होता है, जिन पर कोई सब्सिडी नहीं दी जाती। वर्तमान में दिल्ली में एक कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1,884.50 तक पहुंच चुकी है। इससे व्यवसायिक संचालन की लागत बढ़ती जा रही है जिसका असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) उन परिवारों के लिए एक राहत लेकर आई जो गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। इस योजना के तहत इन परिवारों को प्रति सिलेंडर लगभग ₹300 तक की सब्सिडी दी जाती है जो डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में जमा होती है। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता और गैस कनेक्शन को आपस में लिंक करना आवश्यक होता है।
बजट प्रबंधन: समय की मांग
बढ़ती कीमतों के साथ ही आम आदमी को अपने मासिक बजट को समझदारी से बनाने की जरूरत होती जा रही है। तेल विपणन कंपनियां हर महीने दरों की समीक्षा करती हैं जिससे उपभोक्ता हमेशा अपडेट रह सकते हैं। MyLPG जैसे एप्लीकेशन उपभोक्ताओं को नई दरें जानने तथा बुकिंग करने में मददगार साबित हो सकते हैं।
Disclaimer: इस लेख का उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है और इसे वित्तीय या निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। कृपया किसी भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से संपर्क करें।









